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हर मौसम बदल जाता है।

सुख -दुःख आता जाता है, केवल मन भरमाता है। मन तू इतना क्यों घबराए, हर मौसम बदल जाता है। कभी धूप है कभी छाँव है, जीवन यूँ ही चलता जाता है। जो आया है वो जाएगा  समय कहाँ रुक पाता है। मन तू इतना क्यों घबराए, हर मौसम बदल जाता है।

"मैं" की यात्रा।

खुद को जानने से पहले मुझे लगा— पूरी दुनिया सिर पर उठा लूँ, थोड़ी-सी नादान बन जाऊँ, सारे रिश्तों को तराजू पर तोल लूँ। बिना पंखों के आसमान में उड़ जाऊँ, चाय में चीनी की जगह नमक मिला दूँ, सपनों को हवा में उड़ा दूँ, सतरंगी इंद्रधनुष के उस पार चली जाऊँ। क्योंकि… जब मैं खुद को जान लूँगी— मेरे कुछ नियम होंगे, कायदे-कानून होंगे, सीमाएँ होंगी— सभ्यता के नाम पर, संस्कारों के नाम पर, आत्मसम्मान के नाम पर, आस्था के नाम पर, और न जाने किस-किस नाम पर। जिन्हें मैं थोपूँगी— खुद पर, समाज पर, परिवार पर, भगवान पर, समय पर। तब मेरे उड़ते हुए सपने मुझसे टकराएँगे और शायद मैं छोड़ दूँगी वह घुटन— जिसने बहुत समय से मेरी साँस रोक रखी है।

गुरु कृपा

गुरु बिन घट अँधियार है, गुरु बिन सूझे न राम। गुरु कृपा जब बरसती, जगमग होय धाम॥ गुरु सोई जो राम दे, काटे मन की फाँस। जीवन सार्थक हो उठे, मिटे जन्म की प्यास॥ गुरु चरणन की धूलि से, निर्मल होय विचार। मन-मंदिर में राम बसें, मिटे सकल अँधियार॥ गुरु गोविंद एक रस, भेद न मानै कोय। जिन अंतर अनुभव भयो, तिन परम सुख होय॥ "कबीर जी की शैली से प्रेरित मौलिक दोहे"

क्रांति

एक छोटी-सी, पतली-सी धारा, जब अनगिनत धाराओं में मिलती है, तब जन्म लेती है एक नदी। फिर  नदी अपने प्रचंड वेग में बड़े-बड़े साम्राज्यों को बहा ले जाती है। पीछे छोड़ जाती है एक उपजाऊ धरती, जिसकी गोद में नई पीढ़ियाँ अपनी सभ्यता के बीज बोती हैं।

युवा शक्ति

युवा जब मुस्कुराता है, तब राष्ट्र आगे बढ़ता जाता है। युवा अपने ही भविष्य के लिए जब सड़क पर उतर आए। यह केवल उसका संघर्ष नहीं, देश के भविष्य की  पुकार है। जो मौन हैं— वे भी इस आंदोलन का हिस्सा हैं, उनकी खामोशी— समय की सबसे गहरी गवाही है, वे तुम्हें देख रहे हैं— तुम्हारी हर आवाज़ सुन रहे हैं, वे प्रतीक्षा में हैं— सरकार के व्यवहार की, क्योंकि.... इतिहास गवाह है— बदलाव का सबसे निर्णायक मोड़ सत्ता के फैसलों पर निर्धारित होता है।

प्राथना 🙏

हे माँ काली! मेरे भीतर के भय को  साहस में, अज्ञान को  ज्ञान में, क्रोध को  करुणा में, और अहंकार को  विनम्रता में बदल दीजिए। मेरे जीवन में सत्य,  शक्ति और  सद्बुद्धि का  प्रकाश बना रहे। जय माँ काली। 🌺

आकाश के पथिक

सुनो— हाँ, कहो। तुम्हें क्या लगता है,  ये बादल स्वतंत्र हैं? हाँ, दिखते तो हैं।  क्षितिज से क्षितिज तक भटकते,  पर्वतों की चोटियाँ लाँघते,  सात सागरों की नीरवता पर अपनी छाया बिछाते। जहाँ चाहें ठहर जाएँ;  जहाँ चाहें बरस जाएँ। पर क्या सचमुच? मैं देखती हूँ,  उनकी इस असीम यात्रा के भीतर  एक मौन बंधन भी है। वे उड़ते अवश्य हैं,  पर केवल उड़ने के लिए नहीं;  वे भटकते अवश्य हैं,  पर केवल भटकने के लिए नहीं। अंततः उन्हें लौटना होता है  उस प्यास के पास,  जिसके लिए वे जन्मे हैं। उनका समस्त विस्तार,  उनकी समस्त स्वतंत्रता,  एक करुण दायित्व में आकर विलीन हो जाती है— धरती की सूखी देह पर जल की बूँद बनकर। बादल भी अंत में वही करते हैं,  जिसके लिए वे बने हैं। 🌧️✨