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क्रोध-करुणा की यात्रा!

मनुष्य का जीवन संबंधों की डोर से बँधा होता है। परिवार, पड़ोस और समाज—यही हमारे रोज़मर्रा के संसार की संरचना करते हैं। लेकिन जब इन्हीं संबंधों में बार-बार लड़ाई, कटु शब्द और क्रोध प्रवेश कर जाता है, तब जीवन की शांति धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है। अक्सर ऐसा होता है कि किसी दिन घर या आस-पड़ोस में विवाद हो जाता है। उस समय आवेश में कही गई बातें उस पल को तो पार कर देती हैं, लेकिन उनका वास्तविक प्रभाव अगले दिन दिखाई देता है। सुबह उठते ही जब हम फिर उसी व्यक्ति का चेहरा देखते हैं, जिससे कल तकरार हुई थी, तो मन में अनायास क्रोध जाग उठता है। नकारात्मक विचार हमारे मस्तिष्क में प्रवेश कर जाते हैं और पुरानी बातों को बार-बार दोहराने लगते हैं। यही क्रम यदि लगातार चलता रहे, तो कुछ ही दिनों में एक और लड़ाई होना स्वाभाविक हो जाता है। धीरे-धीरे यह स्थिति जीवन की आदत बन जाती है। क्रोध, नाराज़गी, गलत विचार और कठोर शब्द हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाते हैं। परिणामस्वरूप हमारा आचरण भी बिगड़ने लगता है। हम यह भूल जाते हैं कि जैसी हमारी सोच होती है, वैसा ही हमारा व्यवहार बनता है, और वही व्यवहार हमारे जीवन की दिशा त...

उपनिषद ज्ञान मार्ग

उपनिषद का अर्थ है। अपने गुरु के पास दृढ़ निश्चय के साथ अनासक्त होकर उस ज्ञान के लिए बैठना जो तुम्हें ब्रह्म तक ले जायेगा।         उपनिषद ज्ञान का मार्ग है और ज्ञान मुक्ति का मार्ग है। ज्ञान हमें शक्ति देता है अपनी ज्ञानेंद्रियों पर विजय पाने की, और हमें तन की, मन की, धन की, शासन की वासनाओं से मुक्त करने की।  इमानदार व पवित्र बनो , जो भी करो,   ये मत भूलो कि हम उस परमपिता के गुलाम हैं, उसकी सेवा करने का एक मात्र तरीका है। मानव की सेवा करना। तुम्हारा पर शुभ हो💐