बदलाव की धाराएँ!

एक छोटी-सी, पतली-सी धारा,
जब अनगिनत धाराओं में मिलती है,
तब जन्म लेती है एक नदी।

फिर  नदी
अपने प्रचंड वेग में
बड़े-बड़े साम्राज्यों को बहा ले जाती है।

पीछे छोड़ जाती है
एक उपजाऊ भूमि,
जिसकी गोद में
नई पीढ़ियाँ
बोती हैं अपनी सभ्यता के बीज।

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