सपनों का शहर !
बेरंग ज़िन्दगी में रंग भरेगा कौन।
सपनों की नगर में बसेगा कौन।
हर कोई खड़ा है यहाँ खंजर लिए,
इस अंधेर नगरी में सुनेगा कौन।
मार्ग सत्य,अहिंसा का हो या शैतानी,
इस शहर में संदेश सुनायेगा कौन।
युद्ध-भूमि में बिलबिलाती भूख,
इस भुख की शब्दावली बदलेगा कौन।
अच्छाई और बुराई के अपने-अपने दावे
युद्ध के मैदान में जीतेगा कौन।
अब पीड़ा की गूँज कहीं पहुँचती नहीं,
"नृशंसताओं,, की रूह को खोजेगा कौन।
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