नये युग की शक्ति!

लड़कियों ने बदल लिए हैं रास्ते,
तुम्हारे और अपने वास्ते।

अब द्रौपदी ने पासे सँभाल लिए हैं।
वह बन गई है प्रहरी अपनी स्वयं की ।

सीता को अब भी स्वर्ण-मृग लुभाता है,
अब वो लकीर है स्वयं आत्मसम्मान की  ।

वह राष्ट्र के स्वप्नों की उजली ज्योति है,
सीमा पर अडिग खड़ी प्रथम पंक्ति की शक्ति है।

वह पालनहार है, ममता का अथाह सागर भी,
समय पुकारे तो वज्र-सी प्रचंड हुंकार भी।

अब वह केवल अपना नहीं,
समूचे युग का दायित्व संभालती है;

झाँसी की रानी सी ज्वाला।
अपने भीतर जगा ली है 

अब वह किसी कथा की पात्र नहीं,
स्वयं महाकाव्य का उद्घोष है।

वह इतिहास के पन्नों में नहीं 
स्वयं इतिहास का शब्दकोश है।

वह भविष्य की रचयिता है,
वह परिवर्तन का विश्वास है;
अब किसी युग की प्रतीक्षा नहीं,
स्वयं नये युग का आरंभ है।

लड़कियों ने बदल लिए हैं रास्ते,
अपने और आने वाले समय के वास्ते।

Comments

Popular posts from this blog

कर्म ही सत्य है!

“आलस! जीवन बना दे श्मशान”

सरस्वती माँ शारदे