“दस्तक निषेध है”

मैं भूली नहीं बीती बातें,
उन पर बस मिट्टी डाली है।
अपनी आदतों से उन्हें
यूँ सींचा न करो।

दर्द की आँधियाँ छुपाए हूँ,
इस दिल पर दस्तक
बेवजह किया न करो।

असलीयत पर पर्दे गिराए रखे हैं,
तुम झोंके की तरह
यूँ आया–जाया न करो।

औरत के रूप अनेक
घर सोहे  लक्ष्मी रुप,
तुम चण्ड-मुण्ड बना न करो।

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