चालाक आदमी बोला

आज मैंने चालाक आदमी को देखा अपनी बंद खिड़की के शीशे से, वह सड़क पर कभी इधर कभी उधर लड़खड़ाते चल रहा है। चारों ओर धुआँ और आग ही आग है. गली, मोहल्ले सब जल रहे हैं तभी मैंने अपनी बंद खिड़की से देखा, कि एक भीड़  सड़क के  ओर से दौड़ती आ रही है, नारे लगाते, हाथ में डंडे लिए. जो रास्ते में है सब जलाते, चालाक आदमी के पास पहुँचे, उन्होंने उससे नाम पुछा और नारे लगाने को कहा पर वह सबका चेहरा देखकर हंस रहा है, भीड़ ने उसे पागल कहा और वहाँ से चली गईं। तभी दूसरी ओर से एक और भीड़ आ गई है, उसने भी नाम पुछा और नारे लगाये , चालाक आदमी अभी भी उनके चेहरे देख कर हस रहा है। वो भी उसे छोड़ कर आगे बढ़ गए हैं। चालाक आदमी आगे बढ़ने लगा कि पुलिस आ गयी, पुलिस ने कहा '
अबे पागल है !
यहाँ बीच सड़क पर क्या कर रहा है।
तूने शराब पी हुईं है,
यहाँ मर वर जायेगा,
जा घर जा-
परिवार वाले परेशान होंगे,
जा घर जा,
चालाक आदमी ने पुलिस को रुकने का इशारा किया और जेब में हाथ डालकर कुछ दिखाने लगा। पुलिस ने कहा '
अबे ये राख है इसका हम क्या करें।
हमेशा चुप रहने वाले 'चालाक आदमी, आज बोला ..... 
अब मैं,
अपना परिवार जेब में लेकर चलता हूँ. 
दो बच्चे एक पत्नी और 
दो. बी. एच. के. का घर, 
सब जेब में लेकर चलता हूँ।
साहब,
दंगों ने सब खाक़ कर दिया,
मैं खाक़ जेब में लेकर चलता हूँ।
अब मैं,
अपना परिवार जेब में लेकर चलता हूँ- -

वह धीरे-धीरे मेरी आँखों से ओझल हो गया😔
दंगों में बहुत कुछ बर्बाद हो जाता है आम लोगों का, देश में आपसी भाईचारा और प्यार बना रहे यही कामना है।       
                                #देवी 

 ''जाॅनी लीवर जी का एक वीडियो से  प्रेरित होकर लिखे मेरे कुछ शब्द,,

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