तुम चाय पे ना बुलाते

हवाएं घटाएं हमें ना सताते।

अगर चाय पर तुम हमें ना बुलाते।


तुम्हें देख नजरें चुराना, छुपाना,

अदाएं, सलीके, शरारत, बहाना,

हमारी अदाएं हमें ना सताते।

अगर चाय पर तुम हमें ना बुलाते


चुड़ी बिंदि झुमके, नयन के इशारे,

सुबह-शाम, सूरत बदलते नजारे,

समा खूबसूरत हमें ना सुहाते।

अगर चाय पर तुम हमें ना बुलाते।


मगन मन मधुर मधुर संगीत गाएं,

पुलक हृदय में प्रेम लहर लहराएं,

कहानी, तुम्हारी हमें ना सुनाते।

अगर चाय पर तुम हमें ना बुलाते। 


कभी बेवजह यूं न हम मुस्कुराते,

समय को कभी हम न ऐसे चुराते।

अगर बात दिल की हमें ना बताते,

अगर चाय पर तुम हमें ना बुलाते।





            
                                      #देवी

Comments

Popular posts from this blog

कर्म ही सत्य है!

आलस

सरस्वती माँ शारदे