कुंभ

त्रिवेणी, माधव, आलोक, शंकरी,
श्री पढ़े हनुमान जी।
मैं नागवस की नवग्रह मंदिर,
प्रिय भूमि श्री राम की ।
मैं भजन हुंँ मंदिरों की,
भक्तों की पूकार हुँँ।
श्रिवेणी के तट पर शोभित,
मैं तीर्थों में तीर्थराज हुँ।
मैं पावन प्रयाग हुँ
मैं पावन प्रयाग हुँ।
                             
                           ''देवी''

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