Posts

Showing posts from August, 2024

सूखे सफ़ेद गुलाब!

सूखे सफ़ेद गुलाब! सदियों पहले अस्त हुई मेरे मुख की हँसी को  दिल के अहसास को  मेरे भाव को क्या दिनकर लौटा पाएगा ? मेरे अंंतर मन की  मरती हुई मेरी चेतना को  मेरी इच्छा को  मेरे सपनों को  क्या ये फूल खिला पाएगा ? एक विशाल-विरान रेगिस्तान से जीवन को  एक सुखी बंजर जमीन को  नीरस‌ दरख़्त को क्या ये सावन भिगा पाएगा ? मेरे शरीर को नौचते श्रापित मनुष्य को  सिसकती, बेबस सांसों को  आँखों पे पट्टी बाँधे मूकदर्शक को क्या समय सब भुला पाएगा ? हे कण-कण में बसने वाले! अपने इस अन्श को मेरी माँ की कोख को  मेरे पिता के लाड को क्या इंसाफ दिला पाएगा ?